ख़ूबी किस्में नहीं इस चमन में!
झाँक कर देखो किसी के मन में!
आया है पथ्हर भी अडिग रहने की फिराक में!
पर बिछ जाता है पंथी की राह में!
बह गया वो नदिया की धार में!
जिसने पुकारा खुद को ऐतबार से!
तिरा तभी खुद को संभाल के!
औरों की खूबी को ढूँढ़ निकाल के!
कोई बुलबुला तो कोई तिनका!
कोई बूँद बनकर बदन पर छलका!
कहीं किरण की रेशम बलखा!
कहीं मिला कोई पथ्हर तल का!
मेरी राह में कांटे भी बिछे होंगे!
उन्हें हम जैसे अक्सर मिले होंगे!
उनको कहना है आज मुझे हृदय से!
योगदान उनका भी लूँगा विनय से!
जीवन यज्ञ में अपनी आहूति देकर!
पूर्ण करूँ यह जीवन बहकर!
किनारे रहकर क्या मै पाऊँ!
कोई पूछे तो क्या बतलाऊँ!
एक ही जीवन है जिसको जाना है!
आगे की पीढ़ी के लिए कुछ कर जाना है!
झाँक कर देखो किसी के मन में!
आया है पथ्हर भी अडिग रहने की फिराक में!
पर बिछ जाता है पंथी की राह में!
बह गया वो नदिया की धार में!
जिसने पुकारा खुद को ऐतबार से!
तिरा तभी खुद को संभाल के!
औरों की खूबी को ढूँढ़ निकाल के!
कोई बुलबुला तो कोई तिनका!
कोई बूँद बनकर बदन पर छलका!
कहीं किरण की रेशम बलखा!
कहीं मिला कोई पथ्हर तल का!
मेरी राह में कांटे भी बिछे होंगे!
उन्हें हम जैसे अक्सर मिले होंगे!
उनको कहना है आज मुझे हृदय से!
योगदान उनका भी लूँगा विनय से!
जीवन यज्ञ में अपनी आहूति देकर!
पूर्ण करूँ यह जीवन बहकर!
किनारे रहकर क्या मै पाऊँ!
कोई पूछे तो क्या बतलाऊँ!
एक ही जीवन है जिसको जाना है!
आगे की पीढ़ी के लिए कुछ कर जाना है!
Wow
ReplyDeleteAmazing!!