बीते दिनों को याद किया तो निकले कुछ ऐसे पल,
भूलना न चाहते थे उन्हे फिर भी गए वो निकल,
खूब याददाश्त है अपनी जो ढूंढ निकाला उन्हे,
जो थे अपने पुराने हसीं और खूबसूरत लम्हे।
वो माँ का प्यार, पिता की थपकी और ज्ञान,
वहीं फिर कुछ शैतानी, तो गलती पर थोड़ी सी डांट,
दोस्तों के साथ स्कूल में खेल और पढ़ाई की यादें,
मास्टर जी की भप्की और प्रिंसिपल की डांटे।
वो मिलकर खाना सभी का साथ में खाना,
बनाना बीमार पड़ने का भी साथ में बहाना,
परीक्षा की तैयारी में झोंकना खुद को परस्पर,
माता पिता के कहने पर बढ़ते रहना उन्नति के पथ पर।
दोस्तों क साथ विद्यालय में खेल कूद का बहाना,
भाई-बहनो क साथ घर की शादी में उत्पात मचाना,
शिक्षक का हमको बस प्रोत्साहित करते ही रहना,
घर के बड़ों का अपना माथा पकड़े ही रहना।
घर के बहार मिट्टी में लोट पोट होकर घर लौटना,
माँ को मनाना की पिताजी से ना कहना,
फिर भी पिताजी का गलती को आसानी से भांपना ,
मुस्कुराकर सो जाना और किसी से कुछ न कहना।
घूमने जाना रविवार को परिवार के साथ,
और विद्यालय से पिकनिक यारों के साथ,
कुछ भूल कर आना, और सुनना माँ की फटकार,
निकाल कर लाना अपनी गुल्लक, फिर देखना माँ का प्यार।
कुछ नया सीखा तो शेखी बखारना,
आसमान में देखते हुए कभी पूरा दिन गुज़ारना,
पतंगें गिनना, कटी पतंग को दूर तक देखना,
पड़ोस में बंटी के साथ शाम को पिक्चर देखना।
विद्यालय में नए छात्र को थोड़ा परेशान कर दोस्त बनाना,
खेल कूद में ही नहीं, बल्कि पढ़ाई में भी रिकॉर्ड बनाना,
विद्यालय का नाम प्रतियोगिता में रोशन किया,
खुद को विद्यालय के इतिहास में रोशन किया।
मंदिर में पुजारी के साथ काम करना,
भंडारों में लोगों की सेवा में वाहवाही कमाना ,
भगवान् से माँगना कि दोस्त की तबीयत ठीक कर दें ,
ताकि हम उसके साथ खेल कर अपनी तबीयत हरी कर लें।
वो कहते थे की हम देश का भविष्य बनेंगे,
कमाल के काम सब मिलकर करेंगे,
कर तो रहे है कमाल के काम हम आज,
पर साथ नहीं है कोई भी संग में आज।
दोस्तों से मिले हुए ही बीत गई सदियां,
भाई-बहनो में भी बढ़ गयी दूरियाँ ,
अब सिर्फ बातों से ही जी भर लेते है,
मिलेंगे कभी की दुहाई ही देते हैं।
भूलना न चाहते थे उन्हे फिर भी गए वो निकल,
खूब याददाश्त है अपनी जो ढूंढ निकाला उन्हे,
जो थे अपने पुराने हसीं और खूबसूरत लम्हे।
वो माँ का प्यार, पिता की थपकी और ज्ञान,
वहीं फिर कुछ शैतानी, तो गलती पर थोड़ी सी डांट,
दोस्तों के साथ स्कूल में खेल और पढ़ाई की यादें,
मास्टर जी की भप्की और प्रिंसिपल की डांटे।
वो मिलकर खाना सभी का साथ में खाना,
बनाना बीमार पड़ने का भी साथ में बहाना,
परीक्षा की तैयारी में झोंकना खुद को परस्पर,
माता पिता के कहने पर बढ़ते रहना उन्नति के पथ पर।
दोस्तों क साथ विद्यालय में खेल कूद का बहाना,
भाई-बहनो क साथ घर की शादी में उत्पात मचाना,
शिक्षक का हमको बस प्रोत्साहित करते ही रहना,
घर के बड़ों का अपना माथा पकड़े ही रहना।
घर के बहार मिट्टी में लोट पोट होकर घर लौटना,
माँ को मनाना की पिताजी से ना कहना,
फिर भी पिताजी का गलती को आसानी से भांपना ,
मुस्कुराकर सो जाना और किसी से कुछ न कहना।
घूमने जाना रविवार को परिवार के साथ,
और विद्यालय से पिकनिक यारों के साथ,
कुछ भूल कर आना, और सुनना माँ की फटकार,
निकाल कर लाना अपनी गुल्लक, फिर देखना माँ का प्यार।
कुछ नया सीखा तो शेखी बखारना,
आसमान में देखते हुए कभी पूरा दिन गुज़ारना,
पतंगें गिनना, कटी पतंग को दूर तक देखना,
पड़ोस में बंटी के साथ शाम को पिक्चर देखना।
विद्यालय में नए छात्र को थोड़ा परेशान कर दोस्त बनाना,
खेल कूद में ही नहीं, बल्कि पढ़ाई में भी रिकॉर्ड बनाना,
विद्यालय का नाम प्रतियोगिता में रोशन किया,
खुद को विद्यालय के इतिहास में रोशन किया।
मंदिर में पुजारी के साथ काम करना,
भंडारों में लोगों की सेवा में वाहवाही कमाना ,
भगवान् से माँगना कि दोस्त की तबीयत ठीक कर दें ,
ताकि हम उसके साथ खेल कर अपनी तबीयत हरी कर लें।
वो कहते थे की हम देश का भविष्य बनेंगे,
कमाल के काम सब मिलकर करेंगे,
कर तो रहे है कमाल के काम हम आज,
पर साथ नहीं है कोई भी संग में आज।
दोस्तों से मिले हुए ही बीत गई सदियां,
भाई-बहनो में भी बढ़ गयी दूरियाँ ,
अब सिर्फ बातों से ही जी भर लेते है,
मिलेंगे कभी की दुहाई ही देते हैं।
No comments:
Post a Comment