Monday, December 18, 2017

जीवन डगर

ख़ूबी किस्में नहीं इस चमन में!
झाँक कर देखो किसी के मन में!
आया है पथ्हर भी अडिग रहने की फिराक में!
पर बिछ जाता है पंथी की राह में!

बह गया वो नदिया की धार में!
जिसने पुकारा खुद को ऐतबार से!
तिरा तभी खुद को संभाल के!
औरों की खूबी को ढूँढ़ निकाल के!

कोई बुलबुला तो कोई तिनका!
कोई बूँद बनकर बदन पर छलका!
कहीं किरण की रेशम बलखा!
कहीं मिला कोई पथ्हर तल का!

मेरी राह में कांटे भी बिछे होंगे!
उन्हें हम जैसे अक्सर मिले होंगे!
उनको कहना है आज मुझे हृदय से!
योगदान उनका भी लूँगा विनय से!

जीवन यज्ञ में अपनी आहूति देकर!
पूर्ण करूँ यह जीवन बहकर!
किनारे रहकर क्या मै पाऊँ!
कोई पूछे तो क्या बतलाऊँ!

एक ही जीवन है जिसको जाना है!
आगे की पीढ़ी के लिए कुछ कर जाना है!

Bubble

Here I am a bubble in your wine,
Adding a fizz to your delight.

Mingling with others to crack it up,
Trying to tempt you to drink it up.

Most of us get up to the air and get mixed,
Few of us stick to the side to be fixed.

Up comes the others making us thick,
We manage to the surface and there we stick.

Some under the ice and few inside the straw,
All has different fate starting from the raw.

Life is short, your drinking makes it shorter,
Flat without bubbles is never on the order.

छोटा बदलाव

हर करम पर ऊँगली उठाई इस ज़माने ने, करम न हुआ अपराध हो गया!
जिनको समझते थे की वो समझते हैं, वो ही हमारा थानेदार हो गया!
खुद ही इलज़ाम लगाया खुद ही करी सुनवाई, सज़ा ऐसी दी कि दिल बहुत दुखाया है!
आराम न उधर है न इधर है करार, सज़ा मिली मुझे दुःख दोनों ने पाया है!
वो कहें कि बदल गया उनका जना, मैंने समझा बदलाव तो समय की माया है!
समय बदल जाता है तो इंसान भी बदलेगा, हमें भी समय ने ही तो बनाया है!
अब बदलाव को गले अगर कोई न लगाए, फिर दोषी समय नहीं इंसान कहलाया है!
अब बदलाव से रिश्ते भी बदले हैं, पर सुकून तो किसी ने न पाया है!
आदत अगर बदलाव की ही पड़ जाये, सारा जग अपने क़दमों में पा जाएँ! 

एक पल इंतज़ार

आज फिर एक बार एहसास हुआ है, की प्यार मुझे फिर एक बार हुआ है,
सोचा न था इतनी जल्दी लौट कर आएगा, मुझे ये एहसास बार बार हुआ है!
कहते है दूर रहने से लगे पता प्यार का, दूरी बन गयी सज़ा ये आभास हुआ है,
इंतज़ार है उनका दिल बेक़रार है, दिन हैं थोड़े पर समय दीवार बना है!
प्यार का ये रूप समझ में न आया, पर सच कहें तो इंतज़ार में भी मज़ा है,
अब उसके आने पर ही चैन आएगा, दिल को करार और मन को सुकून आएगा!